बेमौसमी गर्मी के कुछ दिन बाकी, सक्रीय WD फिर से लेकर आ रहे आंधी के साथ बारिश और ओलावृष्टि

मार्च का महीना धीरे धीरे उत्तर भारत के मौसम को एक नए मोड़ की तरफ़ ले जा रहा है। सर्दियों की ठंड भरी हवाएं अब लगभग पीछे छूट चुकी है और गर्मी की आहट भी साफ महसूस होने लगी है। मगर इसी बदलते मौसम के बीच वायुमंडल के ऊपरी हिस्सों में कुछ ऐसी हलचलें शुरू हो चुकी हैं जो आने वाले दिनों में मौसम का मिज़ाज बदल सकती हैं।

मौजूदा सायनॉप्टिक स्थिति, ऊपरी हवाओं के पैटर्न और वैश्विक संकेतों को देखकर ऐसा लग रहा है कि आने वाले दिनों में मौसम दो अलग अलग दौर से गुज़रेगा। पहले फेस में मौसम काफी हद तक शांत और सूखा रहेगा, जबकि दूसरे फेस में WD की गतिविधियां तेज़ होकर बारिश, आंधी, धूल भरी आंधी और कहीं कहीं ओलावृष्टि जैसे हालात भी पैदा कर सकती हैं। पहाड़ों में इसी दौरान बारिश और बर्फबारी के अच्छे दौर देखने को मिल सकते हैं।

फिलहाल मौसम पर एक स्थिर दबाव व्यवस्था का असर बना हुआ है जो मैदानों में मौसम को बदलने नहीं दे रही।

पहला फेस: 07 मार्च से लगभग 14 मार्च तक

अभी के समय उत्तर भारत का मौसम एक तरह की स्थिरता के दौर से गुजर रहा है। पश्चिम एशिया की तरफ़ से दो कमजोर WD धीरे धीरे भारत और हिमालय की तरफ़ बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। पहला सिस्टम लगभग 09 से 10 मार्च के आसपास पहुंचेगा और दूसरा 12 से 13 मार्च के आसपास असर दिखा सकता है।

लेकिन यह दोनों सिस्टम बहुत ताकतवर नहीं हैं। ऊपरी स्तर की हवाओं से इन्हें ज़्यादा सहारा नहीं मिल रहा और निचली स्तर पर अरब सागर से आने वाली नमी भी सीमित है। इसी वजह से इनका असर मुख्य रूप से पहाड़ी इलाकों तक ही सीमित रहने की उम्मीद है।

जम्मू कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में लंबे सूखे अंतराल के बाद मौसम में बढ़िया हलचल देखने को मिलेगी। कहीं हल्की से मध्यम बारिश तो ऊंची चोटियों पर ताज़ा भारी बर्फबारी का दौर भी शुरू होगा। पहाड़ों के ऊपरी हिस्सों में बर्फ गिरने का यह दौर वहां के मौसम को फिर से ज़िंदा सा कर देगा।

मध्य और निचले पहाड़ी इलाकों में इन सिस्टम का असर बहुत सीमित रहेगा। यहां कहीं कहीं हल्की फुहार या बूंदाबांदी के छोटे छोटे दौर देखने को मिल सकते हैं।

अगर मैदानों की बात करें तो पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश के अधिकतर हिस्सों में मौसम लगभग सूखा ही बना रहेगा। हालांकि 09 मार्च के बाद ऊंचाई वाले बादलों की आवाजाही थोड़ी बढ़ सकती है। ये बादल कभी कभी आसमान को हल्का धुंधला या आंशिक बादलों से ढका हुआ बना देंगे, लेकिन उनसे बारिश की उम्मीद बहुत कम है।

दरअसल इस सूखे मौसम के पीछे एक अहम वजह छिपी हुई है। इस समय पश्चिमी भारत और पाकिस्तान के ऊपर एक मजबूत हाई प्रेशर पैटर्न लगातार सक्रिय है। यह दबाव व्यवस्था पूरे इलाके के मौसम को शांत, गर्म और स्थिर बनाए हुए है। जब तक यह हाई प्रेशर कायम रहता है, तब तक कमजोर WD मैदानों में कोई खास मौसम नहीं बना पाते। वे सिर्फ पहाड़ों तक ही सीमित रह जाते हैं क्योंकि वहां की भौगोलिक बनावट उन्हें थोड़ी मदद दे देती है।

सीधे शब्दों में कहें तो इस समय उत्तर भारत के मैदानों में सूखे मौसम की एक तरह से हुकूमत चल रही है। इस हुकूमत को खत्म करने के लिए एक बड़ा और ताकतवर सिस्टम चाहिए जो इस स्थिर दबाव को तोड़ सके। इसी वजह से इस पहले दौर में मैदानों में मौसम ज्यादा बदलता हुआ नजर नहीं आएगा।

अगर तापमान की बात करें तो अधिकतम और न्यूनतम तापमान लगभग उसी दायरे में बने रह सकते हैं जो पिछले कुछ दिनों से देखे जा रहे हैं। दिन में हल्की गर्माहट महसूस हो सकती है, लेकिन कुल मिलाकर तापमान में कोई बड़ा उतार चढ़ाव नहीं होगा।

दूसरा दौर: 15 मार्च से 22 मार्च तक

मार्च के मध्य तक आते आते मौसम का रंग थोड़ा बदलता हुआ दिखाई दे सकता है। इस समय एक महत्वपूर्ण वैश्विक संकेत जिस पर मौसम वैज्ञानिक नजर रख रहे हैं वह है MJO as Madden Julian Oscillation, जो भारतीय महासागर के आसपास सक्रिय होने की तरफ़ बढ़ रहा है।

जब यह प्रणाली इस क्षेत्र में सक्रिय होती है तो वातावरण में नमी बढ़ती है और कई बार WD को भी ज्यादा ताकत मिलने लगती है। इसी बदलते माहौल के बीच 15 मार्च के आसपास एक मध्यम श्रेणी का WD उत्तर भारत की तरफ़ बढ़ सकता है। यह सिस्टम पहले वाले सिस्टम की तुलना में कहीं ज्यादा असरदार हो सकता है।

यह मजबूत सिस्टम मौजूदा पश्चिमी भारत और पाकिस्तान के हाई प्रेशर पैटर्न को कमजोर करेगा, जैसे ही यह दबाव व्यवस्था टूटेगी, मौसम बनने के लिए अनुकूल हालात तेजी से तैयार होने लगेंगे। ऐसे में मैदानों के ऊपर convergence zone बनना आसान हो जाता है, जहां नमी, गर्मी और अस्थिरता मिलकर सक्रिय मौसम तैयार करती हैं।

15 से 17 मार्च के बीच जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ों में व्यापक बारिश और बर्फबारी का दौर देखने को मिल सकता है। ऊंचे पहाड़ी इलाकों में अच्छी बर्फबारी की संभावना है।

मैदानों में इसी दौरान सतही गर्मी और WD के असर के मिलन से वातावरण में convective instability बनेगी, इसके चलते पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा, उत्तर और मध्य राजस्थान, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश, आंधी, धूल भरी आंधी और कहीं कहीं ओलावृष्टि की गतिविधियां होने की संभावना है। यह गतिविधियां हर जगह एक जैसी नहीं होंगी, लेकिन कुछ इलाकों में मौसम बदलेगा कुछ जगह साफ भी रह सकता है।

दक्षिणी राजस्थान, मध्य प्रदेश, बुंदेलखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश को शायद इस सिस्टम के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़े, हालांकि यहां भी कहीं कहीं हल्की बारिश की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

18 मार्च से 20 मार्च के आसपास अगला WD

हमारे अनुमान के अनुसार अभी 18 मार्च से 20 मार्च के बीच एक और सक्रीय WD उत्तर भारत की तरफ़ आ सकता है। शुरुआती अनुमान में यह सिस्टम धीमी गति से आएगा। अगर ऐसा होता है तो मौसम की गतिविधियां और ज्यादा फैल सकती हैं।

इस दौरान पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के अलावा गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार तक भी बारिश, आंधी और ओलावृष्टि की घटनाएं देखने को मिल सकती हैं।

मार्च के आखिरी हिस्से में अक्सर इसी तरह का मौसम देखने को मिलता है जब WD और बढ़ती गर्मी आपस में मिलकर मौसम को काफी सक्रिय बना देते हैं।

मार्च के अंत से अप्रैल की शुरुआत

मौजूदा शुरुआती संकेत बताते हैं कि 20 मार्च से 05 अप्रैल के बीच उत्तर भारत में WD की गतिविधियां काफी सक्रिय रह सकती हैं।

अगर यह पैटर्न बना रहता है तो इस दौरान बार बार मौसम सिस्टम आते रह सकते हैं और कई बार बादल, बारिश और temp में गिरावट जैसे हालात देखने को मिल सकते हैं। कुछ दिनों के लिए मौसम फिर से ठंडक का अहसास भी करा सकता है।

किसानों के लिए सलाह

उत्तर भारत के किसानों के लिए आने वाले दिन थोड़े संवेदनशील हो सकते हैं। जिन क्षेत्रों में फसलें पकने के करीब हैं, वहां समय रहते कटाई की तैयारी शुरू करना समझदारी भरा कदम होगा।
क्योंकि बारिश, तेज हवाएं और ओलावृष्टि कभी कभी खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

जैसे जैसे यह मौसम सिस्टम करीब आएंगे, पूर्वानुमान और ज्यादा स्पष्ट होता जाएगा।

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पोस्ट ऑल क्रेडिट sahil bhatt

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