सरसो में आई 500 रूपये तक की भारी तेजी, अब आगे कैसा रहेगा रुझान

किसान और व्यापारी भाइयों, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की खबरों से सरसों के बाजार में इस हफ्ते 400 से 500 रुपये तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कल की ही बात करें तो कल-कल में सरसों के भाव 200-250 रुपये तक तेज हुए हैं। इस हफ्ते जयपुर मंडी में सरसों का भाव 450 रुपये तेज होकर 6800 से सीधा 7250 पर पहुंच गया है, वहीं भरतपुर मंडी में 500 रुपये बढ़कर 6300 से सीधा 6800 पर पहुंच गया है और दिल्ली मंडी में भी भाव 400 रुपये की बढ़त के साथ 6900 पर पहुंच गया है। अगर प्लांटों के भाव पर नजर डालें तो प्लांटों में और ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। गोयल कोटा प्लांट में सरसों का भाव 6600 से 600 रुपये तक बढ़कर 7200 पर पहुंच गया है और सलोनी प्लांट में भी सरसों का भाव 7325 से 575 रुपये बढ़कर 7900 पर पहुंच गया है। अडानी प्लांट की बात करें तो अडानी के बूंदी, गोहाना और अलवर प्लांट पर सरसों का भाव 6750 से 450 बढ़कर 7200 पर पहुंच गया है।

जानकारों के अनुसार सरसों के सीजन की रिपोर्ट देखें तो हर सीजन सरसों के बाजार में 900 से 1000 रुपये की तेजी आती है पूरे सीजन के अंदर और यह तेजी लगभग दिवाली तक आती है, लेकिन इस बार कुछ रोमांचक देखने को मिला है। सरसों के बाज़ार में इस सीज़न की अनुमानित तेज़ी का 65% लक्ष्य अकेले मार्च महीने में ही पूरा हो गया है, जिसके लिए हमने आपको मार्च की शुरुआत से ही खरीदारी की सलाह दी थी। हालांकि, यह तेज़ी हमारी उम्मीद से कहीं ज़्यादा और बहुत जल्दी आ गई है, जो पूरे सीज़न के लिहाज़ से घातक साबित हो सकती है, जैसा कि हमने साल 2021 और 2022 के दौरान भी देखा था। बाज़ार में अन्य तेलों की तेज़ी और सरसों के शुरुआती सस्ते भाव के कारण इसके तेल में निचले स्तरों से करीब 15-16 रुपये प्रति किलो का उछाल आ चुका है, साथ ही, सोया तेल की किल्लत की वजह से डिमांड सरसों तेल की तरफ मुड़ गई है, जिसके चलते यह बड़ी तेज़ी आई है जो पहले से अनुमानित कुल बढ़त का लगभग 60-65% हिस्सा अभी तक कवर कर चुकी है।

इस बार सरसों का उत्पादन 117.5 लाख टन रहने की संभावना जताई जा रही है, जो कि पहले के अनुमान से कम है, क्योंकि अचानक हुई बारिश और तेज हवाओं ने खड़ी फसल को काफी नुकसान पहुँचाया है और कई जगहों पर फसल खेतों में गिर गई है। इस वजह से न केवल कटाई में देरी हो रही है, बल्कि मंडियों में आवक भी घट गई है, ऊपर से खेतों और खुले में पड़ी सरसों खराब होने और दानों में नमी बढ़ने से तेल की मात्रा (ऑयल कंटेंट) पर भी बुरा असर पड़ा है। इसी खराब क्वालिटी की वजह से अब मिलर्स ने अपना ध्यान पुरानी फसल की खरीद की ओर बढ़ा दिया है ताकि काम सुचारू रूप से चलता रहे। सरसों के भाव फ़िलहाल MSP ₹6,200 के ऊपर बने हुए हैं, जिससे सरकारी ख़रीद की संभावना कम है और पिछले सालों के उलट इस बार सरकारी स्टॉक का दबाव भी बाज़ार पर नहीं पड़ेगा, जिसका मतलब है कि सरकारी बिक्री कीमतों को नीचे नहीं गिराएगी। बाज़ार की चाल अब मौसम पर टिकी है; अगर बारिश जारी रही तो दाम और बढ़ सकते हैं, लेकिन मौसम खुलते ही आवक बढ़ेगी जिससे बाज़ार पर फिर से दबाव बढ़ सकता है। जानकारों की सलाह है कि मौजूदा ऊंचे स्तरों पर मुनाफ़ावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) करना समझदारी होगी और जब आवक अपने चरम (पीक) पर हो, तब माल ख़रीदना बेहतर रहेगा; चूंकि अभी पूरा सीज़न बाकी है, इसलिए ट्रेडर्स को आगे भी तेज़ी-मंदी के बीच मुनाफ़ा कमाने के कई मौके मिलेंगे। हालाँकि कल शाम को बाजार बंद होने के बाद गिरावट की खबरें सामने आई हैं जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आज मार्केट कुछ डाउन रह सकता है। बाकि व्यापार अपने विवेक से करे और रोजाना के भाव और आगे की सटीक तेजी और मंदी रिपोर्ट पाने के लिए ले

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